| विश्वजननी तव अगाध महिमा वर्णु शके ना विधाता |
| विश्वजननी तव अगाध महिमा वर्णु शके विधाता |
| सर्वस्थळी तव प्रभाव विलसत तुझीच अवरित सत्ता |
| ज्ञानि भ्रमविसी मोह बंधनि अलिप्त राहुनि स्वत: |
| विष्णूमाया तू शिवशक्ति षण्मुख गणेश माता |
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| शंकर झालो जगदवंदनिय तव कर हाती घेता |
| ब्रम्हाविष्णु इंद्र चंद्र रवि तव पदि ठेविती माया |
| चारी वेदही साही शास्त्रे शिणली तुज आकळता |
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| त्रिभुवन व्यापक तू करूणामयी तू कर्ति करविती |
| कशी करुं तव स्तुती स्तवने मी कुंठित हो मम मति |
| काया वाचा मनबुध्दी सह तुजसि पुजावे ध्यावे |
| नामस्मरणी रंगुनिया तव मी मजला विसरावे |
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| आर्त माझिया भाव मनातील गंगोदक तूं मानी |
| स्नानास्तव जरि तुला अर्पिले कलशामधले पाणी |
| देह झिजावा चंदनापरि वर्जित पर धन दारा |
| तेच तुझया प्रदि मी वाहियले चंदन कुंकू हळिद्रा |
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| सौंदर्यातील सुंदरता तूं नटविसी सृष्टी फुलांनी |
| ऋतुकालोदभव फुले वाहिली तव पदि मी प्रेमानी |
| तू तर स्वामीनी सर्व जगाची उणे तव ऐश्वर्या |
| भावभक्तिमय स्तुतिपाठानी प्रसन्न हो शिवभार्या |
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| तुझेच करितो स्मरण निरंतर हिमधरनगनंदिनी |
| स्विकारूनी घे मानसपूजा हदयी मम प्रकटुनि |
| परिसासम तव नामस्पर्शे देह तोह हो सोने |
| वाहियल्या पदि देह पादूका तुज आहे स्विकरणे |
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| सदभावाचा धूप उजळले दिप दोन मम नयने |
| आरति केलि ओवळुनि मम पंचप्राण प्रीतीने |
| बहु केली पक्वानि कसोशि आवड तव जाणोनि |
| ताबुंल घे स्विकारूनि रवण हे नारळ अहेव लेणि |
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| असेल काहि न्यून राहिले क्षमा करि जगदंबे |
| लोटांगण पदि घालुनि विनवि पावन कर अविलंबे |
| प्रदक्षिणेच्या पदोपदि तव पाप जाई मम विलया |
| अविचल राहो भक्ति पुन्हा दे जन्म तुझे यशगाया |
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| विजयादशमी मंगलवेळा शिलांगणाची आली |
| विजयादशमी मंगलवेळा शिलांगणाची आली |
| पालखी जगदंबेची निघाली । अंबिका शिलांगणास निघाली |
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| गाद्या गिरदया गालीच्यावर |
| अलंका्र लेऊनि मनोहर |
| तेजोमय शोभली । अंबिका शिलांगणा निघाली |
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| वाजंत्रि डफ संबळ वाजति |
| सुरसनई झांजा सूर मिळविति |
| मंगलवाद्यें सुस्वर गर्जति |
| उधळित गुलाल लाली । अंबिका शिलांगणास निघाली |
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| अबदागिर किति मागे पुढती |
| चवरि चांदिची कुणी ढाळती |
| भक्त मंडळी गाती नाचती |
| भजनि तल्लिन झाली । अंबिका शिलांगणास निघाली |
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| आल्या आल्या कुणि सुवासिनी |
| नारळ ओटी तबके घेऊनी |
| ओटी भरूनि तृप्त मनानी |
| नतमस्तक पदि झाली । अंबिका शिलांगणास निघाली |
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| ऐसा मंगल दिसे सोहळा |
| भक्ति प्रेमाचा जणु मेळा |
| नामस्मरणी तल्लिन झाला |
| पाहूनि दृष्टि निभाली । अंबिका शिंगणास निघाली |