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| जगदंब! जगदीश्वरि तू जगजननी |
| जगदंब! जगदीश्वरि तू जगजननी |
| अपार महिमा वर्णु शके कुणि ज्ञानी सुखर मुनि । |
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| असुरमदें सुरवर बहु भ्यालें |
| तव पायि नतमस्तक झाले |
| निर्दाकुनि त्वा असुर सहज ते |
| रक्षियले तत्क्षणी । जगदंब । जगदीश्वरी ......... |
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| रणरागीणि तुज म्हणति सुरेश्वर |
| झालिस महिषार्दिनि |
| कल्पतरुसम निजभक्ता |
| तू रक्षिसि रात्रदिन । जगदंब । जगदीश्वरी ......... |
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| ठाव तुझया पदि दे मज माते |
| माय कुलस्वामिनी |
| कणव तुझ्याविण येईल कोणा? |
| सांग मला स्वामिनी । जगदंब । जगदीश्वरी ......... |
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| टाळ मृदुंगाची साथ |
| टाळ मृदुंगाची साथ |
| वाजंत्रयाची ठेका त्यात |
| आरती आलि दारात |
| जय महाकाली गजरे ।।१।। |
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| उदबत्तीचा सुगंध |
| येतसते मंद मंद |
| ज्ञानियाचा राजा येथ |
| बारवे समीप असे ।।२।। |
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| सर्व गांव पीतो पाणी |
| बारव ही उपसोनी |
| ऋण याचे असे मनी |
| आरतीचा हा हेतु हो ।।३।। |
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| पुढे आहे गणाधीश |
| आरतीस ये आवेश |
| हिलालाचा हो प्रकाश |
| मार्ग दावितसे सकळा ।।४।। |
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| अश्वत्थाचा येथे पार |
| मुंजोबा हा नरहर |
| सार्मथ्याला नाही पार |
| आरती तयाची करु ।।५।। |
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| हेमाडपंती मंदीर |
| येथ उभा महेश्वर |
| पुढे आहे नंदीश्वर |
| आरतीस गर्दी लोटे ।।६।। |
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| मधे आहे हो समाधी |
| सोडोनी सर्व उपाधी |
| कांकाजीना वडिलाआधी |
| मान देऊ या हो येथ ।।७।। |
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| गर्जतसे उफ ढोल |
| सुरु लैजिमींचा ताल |
| नाचताती करूनि गोल |
| देहभान विसरांनी ।।८।। |
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| टाळ मदुंग वाजंत्री |
| मधोमध पंचारती |
| विठठलाचे नामामृति |
| रंगताती भक्तजन ।।९।। |
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| हळुहळु गर्दी दाटे |
| आप्त इष्ट मित्र भेटे |
| आरती छबिना वाटे |
| मारुती मंदिरी येई ।।१०।। |
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| मारुतिची आरती होई |
| पुढे नाटकाची घाई |
| आजकाल भारुडाची |
| प्रथा बंद झाली असे ।।११।। |
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| पुढे आरती दत्ताची |
| आणि विठठल मूर्तिची |
| मंदिरी परतण्याची |
| वेळ आली त्वरा करा ।।१२।। |
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| “रंगशिळेवर नाचावे |
| सख्याहरीसी भेटावे“ |
| एसे आनंदाने गावे |
| वाटेतूनी येता येता ।।१३।। |
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| परतला हो छबिनी |
| झाली गाव प्रदक्षीणा |
| मंदीरातल्या त्या दोन्ही |
| अजुनि पूर्ण होणे असे ।।१४।। |
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| ऐसा “नवरात्र सोहोळा“ |
| छबिन्याची रात्रवेळा |
| प्रतिवर्षी चाललेला |
| देवीभोयरे गावात ।।१५।। |
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| एका जनार्दनी (Ebook) |
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| कोल्हापुर (महालक्ष्मी) |
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| तूळजापुर (भवानीमाता) |
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| माहूर (रेणुकामाता) |
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संर्पक |
| विनय क्षीरसागर |
| अ – 901, सागरदिप सोसायटी, |
| केळकर महाविद्यालयासमोर, मुलुंड- (पूर्व). |
| मुंबई- 400081. |
| घरचा दुरध्वनी क्रमांक : 25635378 |
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