| मम जन्मदात्रिला जग दाखविले फिरूनि |
| मम जन्मदात्रिला जग दाखविले फिरूनि |
| तव अगाध लीला जगदंबे जगजननी । |
| पुण्याई तिचि का? कृपाच तव तिजवरचि |
| जाणीव परी मज भारभूत हो साची |
| ऋणभार कृपेचा अशक्य जरि मज फिटणे |
| तरि जन्मभरि तुज कृतज्ञतेने स्मरणे |
| अंशत: तयाचि फेड कशि तरि व्हावी |
| शेरणी गुळाची राउळि मी वाटावी |
| योजिले असे जरि पूर्ण तूंच ना केले? |
| सोहळा तुळेचा मंदिर गजबजलेले |
| आनंद आगळा आसू दाटले नयनी |
| किं कृतज्ञता मम सरते अश्रुरुपानी |
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| जगदंबे जगनजननी आई अंबिके |
| जगदंबे जगनजननी आई अंबिके |
| करुणामयि म्हणविसि तूं महाकालिके |
| सकल देव सोडुनि तव चरणि शरण मी |
| नको अव्हेरूस मीच कष्टी संभ्रमी |
| वय मम झाले गमते कठिण मन्मना |
| विधिवत तव पूजन मज ज्ञात मुळिच ना |
| जगदंबे स्तुतिस्तवने मजसि येती ना |
| सेवा नच होई करें पूजनेहि ना |
| रात्रदिन ध्यास तुझा लक्ष तव पदि |
| नको परतवुस मजसी ठाव दे पदी |
| जय अंबे जगदंबे न मंत्र या विना |
| जगतजननी तुजवाचुनि कणव ये कुणा? |
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