| बालपणिचा काल मजेचा नशिबी नव्हता लिहिला |
| बालपणिचा काल मजेचा नशिबी नव्हता लिहिला |
| दुखणाईत धरि वडील त्यांच्या सेवेतच बहु गेला |
| किशोर वयि मम छत्र हरवले पिता बंधु नच उरला |
| शिक्षणात हो खंड प्राणी हा उदरार्थी हो झाला |
| जरि होति बहु कला आवडी मुरड घातले छंदा |
| आनंदाला मुकलो झालो पैशाखातर बंदा |
| प्रपंच केला मायपित्यांचा जाणिव कवणा होती? |
| कामापुरते गोड सर्वजण मनात माया नव्हती |
| हौस मौज ती विरून गेली कधीच झाला होम |
| खंत मात्र ही सदैव हृदयि कसे लोपले प्रेम? |
| गृहसौख्याबाबतीत खचितचि मीच अधिक भाग्यचा |
| कलम सुत दुहिता यांच्यासह काल जाई मौजेचा |
| सुन दुहिताचे यश परि जाई निसटुनि थोडया करि |
| असे सतत का व्हावे कारण न कळे विचार करित |
| जवळचेच जर करू लागले मनातुनि दु:खास |
| प्रयत्न जरि मग कीतिक झाले फुकाच हो सायास |
| कर्ति करविती तूचं अंबिके तुलाच हित मम कळतेस |
| जगदंब जगजननी तुझ्याविन कुणास विनवु माते |
| आजवरी जे घडले सारे तूच असे घडवियले |
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