| तव नामरंगि मम जीवन पट हे रंगवि जगदंबके! |
| तव नामरंगि मम जीवन पट हे रंगवि जगदंबके! |
| जीव जन्मता करि रूदने परि हासे जग ते धवा |
| अशी कृति कर हासत जा तूं रडव अखिल विश्वा |
| शरीर जणु हे वस्त्र असं ते शुभ्र धवल असु दे |
| जीवन पट हे दोन घडिचे ध्यानी ठेव इतुके |
| मधुनाम रंगि मम जीवनपट हे रंगवि जगदंबिके |
| भक्तिरंग तव मुरु दे अवधा वस्त्रावरि अंबिके |
| जन्मभरी जरि धुतले अविरत रात्र दिन रजके |
| फाटुनि जावो वस्त्र परि ते होऊ न दे विटके |
| तव नाम रंगि मम जीवनपट हे रंगवि जगदंबि |
| गतकर्माचे रेशिमधागे पंचतत्वी मिसळले |
| अष्टकमल दल चरख्यावर त्या लीलेने विणिले |
| कालावधि नवमासानंतर पट आकाश आले |
| सुखदु:खाच्या चक्रावर्ति देसी तया गिरके |
| तव नाम रंगि मम जीवनपट हे रंगवि जगदंबिके |
| कुसंगती त्या मळिन करी परि अनुतापे शुध्दता |
| सुसंगतिने शुभ्रपणा, दे अनुभूति विविधता |
| गुरुकृपेने ज्ञान रंग ये ईशकृपे श्रेष्ठता |
| घडि बसविणे वा बिघडविणे तव हाती असे अंबिके |
| तव नाम रंगि मम जीवनपट हे रंगवि जगदंबिके |
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| इतुके तरी मज द्यावे अंबे । इतुके तरी मम धावे ।। |
| इतुके तरी मज द्यावे अंबे । इतुके तरी मम धावे ।। |
| अंतकाळि तव नाम मुखि मम आनंदाने यावे ।। धृ।। |
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| सतत तुझे मी केले चिंतन |
| नामी विसरुनि गेलो मीपण |
| अखेर घडि ही व्हावी पावन |
| त्वद्रुपात विरावे । इतुके तरी मम द्यावे । |
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| प्राणहरण मम तूच करावे |
| मायापशी मी न फसावे |
| तव पदि माझे मन गुंतावे |
| रुप चित्ति तुला ध्यावे । इतुके तरी मम द्यावे ।। |
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| क्लेश नसावे माझया शरीरा |
| व्याधि उपाधि न जरा जर्जरा |
| तव गुण गाता तुजसि पहाता |
| संपुनिया मी जावे । इतुके तरी मम धावे ।। |